
कोरबा: कोरबा में कबाड़ कारोबार का खेल भी बड़ा निराला नजर आ रहा है। एक तरफ पुलिस की कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, तो दूसरी तरफ चोरी और कबाड़ कारोबार से जुड़ी शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कार्रवाई के बाद भी कबाड़ के कारोबार का पहिया इतनी तेजी से कैसे घूमने लगा?
बीते दिनों टीपी नगर स्थित एक होटल में कबाड़ियों की बैठक की चर्चा अब शहर में सुर्खियां बटोर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के बाद मेमन भाई और साहू भाई की दोस्ती में ऐसी गर्मजोशी आई कि कारोबार की रफ्तार बढ़ने की चर्चाएं भी तेज हो गईं। अब इसे महज दोस्ती का कमाल कहें या कारोबार में आए नए उत्साह का असर, इसकी असल कहानी जांच के बाद ही सामने आएगी।
कप्तान की कार्रवाई का खौफ या कारोबारियों का नया दांव?
पुलिस कप्तान की सख्ती और कार्रवाई की चर्चा से अवैध कारोबारियों में डर होने की बात कही जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर लगातार शिकायतें और कारोबार में तेजी की चर्चाएं कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही हैं।
कप्तान की नजर जहां अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने में लगी है, वहीं नीचे के स्तर पर क्या चल रहा है, यह बड़ा सवाल बन गया है। आखिर कबाड़ का कारोबार बंद है या सिर्फ कागजों और बयानों में बंद बताया जा रहा है?
कार्रवाई भी जारी, शिकायतें भी जारी और कारोबार की रफ्तार भी बरकरार! ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस पूरे खेल का असली हिसाब-किताब कौन रख रहा है?
15 लाख की कथित डील! हिसाब-किताब का खेल या महज अफवाह?
सूत्रों के हवाले से करीब 15 लाख रुपये की कथित डील और आगामी एक-दो दिनों में भुगतान का हिसाब पूरा होने की चर्चा भी सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है और इसकी भनक बड़े अधिकारियों कहने का मतलब कप्तान तक नहीं पहुंचने देने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, इस कथित लेनदेन और किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है और कौन-कौन इसमें शामिल है।
अगर इन चर्चाओं में दम है, तो सवाल यह भी है कि कप्तान की सख्ती के बीच नीचे कौन अपना अलग हिसाब-किताब बिठाने में लगा है?
कप्तान की सख्ती ऊपर, नीचे का खेल कौन देखेगा?
कोरबा में लगातार चोरी की शिकायतें और कबाड़ दुकानों की गतिविधियां प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई हैं। यदि अवैध कारोबार बंद है, तो शिकायतें किस बात की? और यदि कारोबार फिर जोर पकड़ रहा है, तो कार्रवाई का असर आखिर कहां दिखाई दे रहा है?
अब देखना यह है कि पुलिस कप्तान इन चर्चाओं और शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि शहर में चर्चा तो यह है कि कबाड़ का कारोबार भी गजब है—ऊपर कार्रवाई की तैयारी, नीचे कारोबार की रफ्तार और बीच में दोस्ती के नए किस्से!






