16 साल से कम उम्र की किशोरी से दुष्कर्म, नाबालिग आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास

कोरबा | नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर घर से अगवा करने और करीब 10 महीने तक अपने साथ रखने के गंभीर मामले में कोरबा की विशेष बालक न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अपराध के समय 17 वर्ष की उम्र के रहे अपचारी बालक को गंभीर अपराध के परिणाम समझने में सक्षम मानते हुए बालिग की तरह मुकदमा चलाया और उसे 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

मामला कोरबा शहर के एक स्लम इलाके का है। विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार, आरोपी ने 16 वर्ष से कम उम्र की किशोरी को बहला-फुसलाकर 23 अगस्त 2024 को घर से अगवा कर लिया था। इसके बाद वह उसे 30 जून 2025 तक अपने साथ रखे रहा। बाद में आरोपी ने उसे यह कहते हुए घर से बाहर निकाल दिया कि अब वह उसे अपने साथ नहीं रखेगा। इसके बाद पीड़िता अपने माता-पिता के पास पहुंची और पूरी घटना की जानकारी दी।

मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। शुरुआत में मामले की सुनवाई बाल न्यायालय में चल रही थी। इस दौरान आरोपी की सामाजिक और बौद्धिक क्षमता का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया गया। जांच में यह सामने आया कि अपराध के समय आरोपी अपने कृत्य और उसके परिणामों को समझने की पर्याप्त क्षमता रखता था। इसी आधार पर बाल न्यायालय ने उसे बालिग की तरह विचारण के लिए सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया।

इसके बाद कोरबा की विशेष बालक न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत ने पीड़िता के बयान, गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87 और 65(1) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषसिद्ध करते हुए अधिकतम 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 साल के कारावास और अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है। वर्तमान में दोषी की उम्र लगभग 19 वर्ष है। अदालत ने आदेश दिया है कि उसे 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक विशेष सुरक्षा गृह में रखा जाए। इसके बाद उसे जेल भेजा जाएगा।

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