
कोरबा | शहर में कबाड़ कारोबार को लेकर इन दिनों एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि शहर के एक प्रमुख कबाड़ी के जिला बदर होने के बाद राताखार शराब दुकान के आसपास एक नए कबाड़ी की गतिविधियां बढ़ गई हैं। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं भी सुनने को मिल रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसी इलाके में एक पुराने कबाड़ी को कुछ समय पहले कबाड़ से जुड़े मामले में थाने बुलाकर सख्त हिदायत दिए जाने की चर्चा थी। अब चर्चा यह है कि संबंधित व्यक्ति खुद तो कारोबार बंद होने की बात कह रहा है, लेकिन उसके रिश्तेदार की दुकान के जरिए कबाड़ का कारोबार चलने की बातें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि दुकान पर कबाड़ लाने वालों को कथित तौर पर ‘टोकन’ दिया जाता है और भुगतान बाद में किए जाने की व्यवस्था है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यानी कहानी कुछ ऐसी है—खिलाड़ी बदला, मैदान वही रहा और कबाड़ का खेल भी चलता रहा! प्रशासन की सख्ती के बाद अगर कारोबार सिर्फ नाम बदलकर या रिश्तेदारी के सहारे जारी है, तो यह जांच का विषय जरूर बनता है।
अब सवाल यह है कि राताखार क्षेत्र में चल रही इन गतिविधियों पर संबंधित विभाग की नजर है या नहीं? अगर कबाड़ कारोबार नियमों के मुताबिक चल रहा है तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन यदि प्रतिबंध के बावजूद किसी दूसरे नाम या दुकान के माध्यम से वही गतिविधियां जारी हैं, तो इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल टोकन किसका है, माल किसका है और पैसा किसके पास पहुंच रहा है—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।






