
कोरबा | गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए कोरबा पुलिस ने अपराधियों, निगरानी बदमाशों और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ अभियान तेज किया है। पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई में निगरानी बदमाशों को थाने बुलाकर समझाइश देने के साथ-साथ वारंट और लंबित मामलों में भी कार्रवाई की गई है।
बीते दिनों, कोतवाली थाना परिसर में 64 निगरानी बदमाशों और गुंडों को बुलाकर त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई। इसी अभियान के दौरान एक दिन में 105 लोगों के खिलाफ अलग-अलग वैधानिक कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस की इस सख्ती के बीच कोरबा में सामने आई कुछ घटनाएं एक अलग सवाल भी खड़ा करती हैं। 14 सितंबर को सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पुराने काशी नगर में एक युवक द्वारा कथित तौर पर तलवार लहराकर लोगों को धमकाने का मामला सामने आया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक को पकड़ा और उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की।
सवाल यह है कि कार्रवाई के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों?
त्योहारों के समय पुलिस द्वारा पहले से निगरानी बदमाशों को थाने बुलाना और उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चेतावनी देना निश्चित तौर पर सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। लेकिन दूसरी ओर, यदि इसी अवधि में हथियार लहराने, धमकी देने या सार्वजनिक स्थान पर दहशत पैदा करने जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती हैं, तो पुलिस की निगरानी व्यवस्था और अपराध की रोकथाम को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या सिर्फ थाने बुलाकर समझाइश देना पर्याप्त है?
क्या ऐसे लोगों की लगातार निगरानी हो रही है?
क्या हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो रही है?
और सबसे महत्वपूर्ण—त्योहारों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की जमीनी रणनीति क्या है?
पुलिस की कार्रवाई का सम्मान, लेकिन जवाबदेही भी जरूरी
कोरबा पुलिस द्वारा वारंटियों की गिरफ्तारी और आपराधिक मामलों में कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। लेकिन कानून-व्यवस्था का आकलन केवल गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना कितनी मजबूत है और अपराध की घटनाओं को रोकने में पुलिस की कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित हो रही है।
त्योहारों के दौरान पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरत केवल बदमाशों की परेड कराने की नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, हथियारों के प्रदर्शन पर तत्काल कार्रवाई और शिकायत मिलने पर त्वरित पुलिस हस्तक्षेप की भी है।
सूचना पर तत्काल हस्तक्षेप से अपराध पर लग सकता है अंकुश
कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल त्योहारों से पहले बदमाशों की परेड या समझाइश ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। यदि किसी क्षेत्र से पुलिस को धमकी, मारपीट, हथियार लहराने, विवाद या दहशत फैलाने जैसी गतिविधियों की सूचना मिलती है और पुलिस बिना अनावश्यक देरी के मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करे तथा मामले की गंभीरता के अनुसार तत्काल वैधानिक कार्रवाई करे, तो कई घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही बढ़ने से रोका जा सकता है।
समय पर पुलिस हस्तक्षेप से न केवल पीड़ित और आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि संभावित अपराध को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों के दौरान कोरबा पुलिस की यह सख्ती जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या आम नागरिक बिना डर के त्योहार मना पाते हैं।





