DMF घोटाले की जांच में नया मोड़! कटघोरा में पालिकाध्यक्ष से ज्यादा चर्चा में नगर सैनिक दिलीप केंवट, EOW साथ ले गई टीम

करोड़ों के लेन-देन में बैंक खातों के इस्तेमाल की आशंका, कंबल खरीदी से भी जुड़ रहे तार; आय से अधिक संपत्ति की भी जांच की चर्चा

कटघोरा | राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 30 अक्टूबर को शराब, कोल लेवी और मेडिकल घोटालों से जुड़े मामलों में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरबा और गरियाबंद जिलों के 16 ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई की। कोरबा जिले के कटघोरा में EOW की टीम की दस्तक के बाद पूरे क्षेत्र में दिनभर हलचल बनी रही।

हालांकि इस कार्रवाई में पालिकाध्यक्ष के ठिकाने पर तलाशी की चर्चा रही, लेकिन कटघोरा में सबसे ज्यादा चर्चा नगर सैनिक दिलीप केंवट को लेकर होती रही। आखिर एक नगर सैनिक के यहां जांच एजेंसी क्यों पहुंची? उसके बैंक खातों और कथित लेन-देन में ऐसा क्या सामने आया कि EOW की टीम उसे अपने साथ ले गई?

कंबल खरीदी और DMF फंड के कनेक्शन की चर्चा
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, जांच के तार DMF (जिला खनिज न्यास) की राशि से पंचायतों में वितरित किए गए करोड़ों रुपये के कंबलों की खरीदी से भी जुड़ सकते हैं। बताया जा रहा है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के कार्यकाल में एक फर्म के माध्यम से पंचायतों में कंबल वितरण कराया गया था। इस पूरे मामले में तत्कालीन विधायक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने की चर्चा है।

नगर सैनिक के खातों में करोड़ों के लेन-देन का संदेह!
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कोल लेवी घोटाले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य मिले, जिनमें कटघोरा एसडीएम कार्यालय में पदस्थ नगर सैनिक दिलीप केंवट के बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन की आशंका जताई गई है। दिलीप केंवट को एसडीएम का वाहन चालक भी बताया जा रहा है।

जांच का अहम पहलू यह है कि कथित लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ, किन लोगों के निर्देश पर खातों का इस्तेमाल किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका रही? इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की चर्चाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

अब जांच के घेरे में कौन-कौन?
फिलहाल दोनों ठिकानों से मिले दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है। लेकिन कटघोरा में हुई EOW की कार्रवाई ने DMF घोटाले की जांच को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करोड़ों के कथित घोटाले की जांच केवल लेन-देन तक सीमित रहेगी या इसके पीछे जुड़े प्रभावशाली चेहरों तक भी जांच एजेंसी पहुंचेगी?

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