
कोरबा: छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों की तरह कोरबा जिले में भी पत्रकारिता के नाम पर कथित तौर पर लोगों को परेशान करने और रुपये मांगने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी कुछ लोगों पर पत्रकारिता की आड़ में वीडियो बनाने, कार्रवाई कराने की धमकी देने और पैसों की मांग करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन कथित गतिविधियों से विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों के बीच चिंता का माहौल बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मेडिकल प्रैक्टिशनर भी इस तरह की कथित गतिविधियों से परेशान हैं। आरोप है कि कभी आयुष पद्धति से उपचार करने वाले चिकित्सकों तो कभी एलोपैथी पद्धति से चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों को निशाना बनाकर डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है। कुछ मामलों में वीडियो बनाने, उसे प्रसारित करने अथवा संबंधित विभाग में शिकायत करने की बात कहकर कथित रूप से रकम मांगने के आरोप भी सामने आए हैं।
वीडियो के जरिए दबाव बनाने का आरोप
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में कथित तौर पर ‘खर्चा-पानी’ या अन्य नामों पर रकम मांगने की स्थिति बनती है। आरोपों के मुताबिक, पहले वीडियो या अन्य सामग्री तैयार की जाती है और बाद में उसे विभागीय कार्रवाई अथवा बदनामी से जोड़कर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
पुलिस और संबंधित विभाग से शिकायत की तैयारी
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों द्वारा संबंधित विभाग और पुलिस के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। उनका कहना है कि यदि किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर के कामकाज में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित विभाग को नियमानुसार जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन पत्रकारिता के नाम पर किसी को डराने-धमकाने या अनुचित तरीके से पैसे मांगने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ लोग कथित घटनाओं से संबंधित जानकारी और उपलब्ध साक्ष्य एकत्र कर अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराना और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
फिलहाल, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच और औपचारिक शिकायतों के आधार पर ही हो सकेगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण और कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है, ताकि वास्तविक पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और किसी भी व्यक्ति को अनुचित दबाव या कथित अवैध वसूली का सामना न करना पड़े।






