
त्योहार से पहले मेहनत की मजदूरी के लिए संघर्ष कर रहे सफाईकर्मी, नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय से सवाल—आखिर किस स्तर पर अटका वेतन और कब तक खातों में पहुंचेगी बकाया राशि?
दीपावली की तैयारियों के बीच कोरबा नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर संकट खड़ा होने की खबर सामने आई है। साझा वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण करीब 80 सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है। इसका असर शहर के पांच वार्डों की सफाई व्यवस्था पर पड़ने की बात कही जा रही है। त्योहार के ठीक पहले सामने आए इस मामले ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के प्रति उसकी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिन सफाईकर्मियों के कंधों पर शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी है, उन्हें अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए काम रोकने को मजबूर होना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर तीन महीने तक इन कर्मचारियों का वेतन क्यों नहीं दिया गया? क्या निगम प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर भुगतान की प्रक्रिया जानबूझकर लंबित रखी गई?
तीन महीने का वेतन बकाया, त्योहार पर परिवार कैसे चलाएं कर्मचारी?
सफाई कर्मचारियों के लिए वेतन केवल एक भुगतान नहीं, बल्कि उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों का आधार है। घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, बिजली बिल और त्योहार की तैयारियां सब कुछ इसी मजदूरी पर निर्भर करता है। ऐसे में तीन महीने तक वेतन नहीं मिलना कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है।
सवाल यह भी है कि जब कर्मचारियों का वेतन लगातार लंबित था, तब संबंधित अधिकारियों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? क्या किसी ने इन कर्मचारियों की परेशानी जानने की कोशिश की?

आयुक्त आशुतोष पाण्डेय बताएं, भुगतान किस स्तर पर अटका?
नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय से ग्राम यात्रा का सीधा सवाल है कि सफाई कर्मचारियों का तीन महीने का बताया जा रहा वेतन आखिर किस स्तर पर लंबित है? क्या भुगतान नगर निगम के स्तर पर रुका है या संबंधित ठेका एजेंसी ने कर्मचारियों को मजदूरी नहीं दी है?
यदि कर्मचारी ठेका एजेंसी के माध्यम से कार्यरत हैं, तो निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एजेंसी को भुगतान कब-कब जारी किया गया और कर्मचारियों के खातों में वेतन क्यों नहीं पहुंचा। वहीं यदि निगम स्तर पर बिल लंबित हैं, तो उनके लंबित रहने का कारण और भुगतान की संभावित तारीख सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सिर्फ ठेका एजेंसी को भुगतान कर देना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि सफाई कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी मेहनत की राशि पहुंची या नहीं। इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
पांच वार्डों के नागरिकों को भी सफाई व्यवस्था पर जवाब चाहिए
दीपावली जैसे बड़े त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था बाधित होना आम नागरिकों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। बाजारों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में कचरा जमा होने से स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
नगर निगम को तत्काल प्रभावित पांचों वार्डों की जानकारी सार्वजनिक करते हुए वैकल्पिक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान की निश्चित तारीख भी घोषित करनी चाहिए।



