
गेरवाघाट: बरसात के मौसम में रेत उत्खनन पर प्रतिबंध के बावजूद गेरवाघाट नदी क्षेत्र में रात के अंधेरे में रेत निकाले जाने के आरोपों ने खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात करीब 10 बजे से सुबह तक नदी क्षेत्र में ट्रैक्टरों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। आरोप है कि कई ट्रैक्टर नदी से रेत भरकर रातभर फर्राटे भरते हुए निकलते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस गतिविधि में दर्जनों वाहनों के शामिल होने की बात सामने आ रही है। कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने की बात भी कही जा रही है।
बरसात में प्रतिबंध, फिर रात में किसकी अनुमति?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बरसात के दौरान नदी से रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लागू है, तो गेरवाघाट नदी में रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों की आवाजाही कैसे हो रही है? यदि इन वाहनों द्वारा रेत का उठाव किया जा रहा है, तो क्या उन्हें किसी प्रकार की वैध अनुमति प्राप्त है? अगर अनुमति नहीं है तो प्रतिबंधित अवधि में नदी से रेत निकालने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

वीडियो-फोटो सामने, फिर भी निगरानी पर सवाल
रात के समय नदी क्षेत्र में ट्रैक्टरों की आवाजाही से संबंधित वीडियो और फोटो भी सामने होने की बात कही जा रही है। इनकी वास्तविकता और वीडियो में दिखाई दे रहे वाहनों की वैधता की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रातभर इस तरह वाहनों की आवाजाही हो रही है, तो खनिज विभाग की टीम को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए। वाहनों के दस्तावेज, रॉयल्टी/परिवहन पास और रेत के स्रोत की जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेंगे सवाल
बरसात में प्रतिबंध के बावजूद यदि नदी से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है तो यह गंभीर पर्यावरणीय और प्रशासनिक मामला है। वहीं, यदि वाहन किसी वैध प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं तो विभाग को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब निगाहें खनिज विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। सवाल सीधा है—
जब नदी से रेत निकालने पर प्रतिबंध है, तो गेरवाघाट में रातभर ट्रैक्टर आखिर किसके भरोसे दौड़ रहे हैं?
गेरवाघाट नदी में ट्रैक्टर भर रहे फर्राटे, खनिज विभाग ले रहा खर्राटे—अब देखना है विभाग कब जागता है!






